बड़े चूंचे : डायरेक्ट सुहागरात से।

बड़े चूंचे : डायरेक्ट सुहागरात से
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सुहागरात वाले राज

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बड़े चूंचे : डायरेक्ट सुहागरात से।

तो मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़ के अपने हाथो तले दबा दिया और अपने प्यासे होट मेरे गालो पर

फिसलाने लगा। मेरा दिमाग एक दम से खराब हो रहा था। उसकी कामुक हरकतें मुझे सुलगा

रहीं थीं और वो था कि मुझे चोदे से गुरेज कर रहा था और फालतू का फोरप्ले करके मेरी

आग भड़का रहा था। ऐसे में मैने अपनी गांड हिलानी शुरु कर दी। अब वो मेरे उपर चढ के मुझे

दबा चुका था। अब मै हिल नही सकती थी। धीरे धीरे उसने मेरे होठो पर अपने होठ रख दिये

और लगा उनको चूसने मैं बस दिखावा कर रही थी कि मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

सुहागरात वाले राज

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तो मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़ के अपने हाथो तले दबा दिया और अपने प्यासे होट मेरे

गालो पर फिसलाने लगा। मेरा दिमाग एक दम से खराब हो रहा था। उसकी कामुक हरकतें

मुझे सुलगा रहीं थीं और वो था कि मुझे चोदे से गुरेज कर रहा था और फालतू का फोरप्ले

करके मेरी आग भड़का रहा था। ऐसे में मैने अपनी गांड हिलानी शुरु कर दी। अब वो मेरे उपर

चढ के मुझे दबा चुका था। अब मै हिल नही सकती थी। धीरे धीरे उसने मेरे होठो पर अपने होठ

रख दिये और लगा उनको चूसने मैं बस दिखावा कर रही थी कि मुझे अच्छा नहीं लग रहा है।

होठो को निगल चुके

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पर सच तो ये है कि मैं अपनी रुचि प्रदर्शित नहीं करना चाहती थी। इस वजह से मैने उसको

ऐसा किया था। धीरे धीरे उसके होठ मेरे होठो को निगल चुके थे। दोनो के होठो के बंद

होने से एक दूसरे के मुह का तरल पदार्थ एक दूसरे के अंदर जा रहा था और हम दोनों

लगभग एक होने वाले थे। मैं मदहोश होने जा रही थी पर वो पूरे होश में था कि क्या कर

रहा है और क्या करना होगा। इसलिए उसने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिये। नीचे से ब्रा

का फीता पकड़ के ऐसे खींचा जैसे कि टूट गया।

चूतिये को कौन समझाए

बस एक चूंचा पकड़ के बाहर निकाला और लगा चूसने बेतहाशा। मेरे दूसरे चूंचे में आग

लगी हुई थी। स्तनों को एक साथ मसलना चाहिए इस चूतिये को कौन

समझाए पर वो अलग था। उसका अंदाज ही जुदा था और इसलिए मैं उसे

रोक नही सकती थी। हाय और मैं हल्के हल्के कराहने लगी थी, मेरी सिस्कियां

चूंचों को चूस चुका

उसके चूसने की तेज होती गति के साथ ही तेज होती जा रहीं थीं। मैने अपने होठो

से उसके होठो को फिर से पकड़ने की कोशिश की पर वो

चूंचे से अलग होना ही नहीं चाह रहा था।

चूत तो गीले पन से भीग ही चुकी थी

फिर मैने अपने ब्लाउज से निकाल कर खुद अपना बड़ा

दूसरा चूंचा उसके सामने कर दिया। अब वह उसपर पिल पड़ा और

देखते ही देखते एक दम से उसके अंदर का सारा माल निकालने पर आमदा हो गया।

ऐसी हालत में इतना चूसए जाने के बाद मेरे बदन का तापमान एकदम हाई हो गया था।

मेरी टांगे अपने आप खुलने लगीं थीं और चूत तो गीले पन से भीग ही चुकी थी। खैर मैं

मदहोश थी और वो मेरे चूंचों को चूस चुका था। उसने हाथ

लगाकर मुझे पलट दिया। मेरा मुह बेड की तरफ हो गया और पीठा

आसमान की तरफ। अब मेरी नंगी पीठ उसके सामने थी।

 बेरहमी से मसले मेरे कठोर चूंचे।

मेरी पीठ पर अपने होठों को फिसलाते हुए उसने हल्के ह्ल्के नाखून लगाने भी जारी रखे। नखच्छेद का यह तरीका औरतों को एक दम से पागल बना देता है। मुझे बहुत मजा आ रहा था और ऐसा लग रहा था कि मेरे बदन में कोई घुस रहा है पीठ के माधयम से ही। पर मैने देखा, उसने अपने नर्म गर्म होठो से मेरे बदन के हर तार को छेड़ने की कसम खा रखी थी।

मुझे फिर से सीधा लिटाया

पूरी पीठ को चुसकने के बाद उस्ने मुझे फिर से सीधा लिटाया और मेरे पेट

पर हल्क हल्के हाथों से सहलाने लगा। आह्ह्ह मेरी दिमाग की बत्ती जल गयी।

उसके छुअन में जैसे जादू था। उसने मेरे पेट को छूकर के एकदम से कपकपा दिया।

और फिर मेरी सेक्सी नाभि में उंगली लगाकर गोल गोल घुमाने लगा। हाय मै तो

बेकाबू होने लगी थी। मेरी गहरी सांसों के साथ मेरे मस्त बड़े बड़े चूंचे उपर नीचे होने लगे थे।

नंगी चूंचे से कुछ कहने की कोशिश

और उसने इस बार अपनी नुकीली जीभ मेरे नाभि में घुसा दी। और गोल गोल घुमाने लगा।

मुझे सनसनी हो रही थी और बेचैनी भी। ऐसा लग रहा था कि कैसे मैं अभी इसके मुह

पर अपनी चूत के अंगारे रख कर अपनी ज्वाला शांत कर लूं पर यही बात है कि कैसे

रती जब सब कुछ आज उसके हाथ में था। मैं अपना पेट उपर नीचे करती, कपकपाती

हिलती नंगी चूंचे से कुछ कहने की कोशिश करती पर मेरा साजना तो अपनी ही धुन में था।

अब उसने मुझे फिर पलट दिया। पेटीकोट खोल कर मुझे बिन चड्ढी के कर दिया और मेरी

गांड को चूसने लगा। आह दोनों गांड की गोलाईयों को दबा कर के उसने मेरे

बदन को और भी तपा दिया। इस बार उसकी जीभ मेरे गांड में थी। बस अंदर

बंद टाईट गांड

बाहर करने की नाकाम कोशिश्। बंद टाईट गांड में कहां कुछ हो पाता है। मैं अपने चूंचे

अपने हाथों से दबा रही थी और वो अब चुसक चुसक के मेरी गांड को चूस रहा था।

माने लगा। मुझे सनसनी हो रही थी और बेचैनी भी। ऐसा लग रहा था कि कैसे मैं अभी

इसके मुह पर अपनी चूत के अंगारे रख कर अपनी ज्वाला शांत कर लूं पर यही बात है

कि कैसे करती जब सब कुछ आज उसके हाथ में था। मैं अपना पेट उपर नीचे करती,

कपकपाती हिलती नंगी चूंचे से कुछ कहने की कोशिश करती पर मेरा साजना तो अपनी ही धुन

में था। अब उसने मुझे फिर पलट दिया। पेटीकोट खोल कर मुझे बिन चड्ढी के कर दिया और

मेरी गांड को चूसने लगा। आह दोनों गांड की गोलाईयों को दबा कर के

उसने मेरे बदन को और भी तपा दिया। इस बार उसकी जीभ मेरे गांड में थी।

बस अंदर बाहर करने की नाकाम कोशिश्। बंद टाईट गांड में कहां कुछ हो पाता है।

मैं अपने चूंचे अपने हाथों से दबा रही थी और वो अब चुसक चुसक के मेरी गांड को चूस रहा था।

गांड हिला हिला कर

मैं निस्संदेह मस्ती में थी और मैने मारे मस्ती के गांड हिला हिला कर उसके मुह में देने

की कोशिश करनी शुरु कर दी थी। वो भी खुश था और मैं भी खुश थी तभी,

उसने मुझे पलट दिया। इस बार वो चूत चूसने के मन में था और उसने अपनी

जीभ मेरे टांगों के बीच रख दी। मैने टांगों को एक दूसरे के उपर चढा लिया।

जानबूझकर और वो भी खिलाड़ी था। उसने जीभ वहां से हटा कर के जांघों पर

फिरानी शुरु कर दी। अब तो जांघें मदमस्त हो रही थीं और खुद ब खुद धीरे धीरे

ढीली होने लगीं। उसने मेरे घुटने से उपर का सारा जांघ पूरा अच्छे से अपनी जीभ से

सहलाया और फिर मेरी टांगे खुल गयीं। मेरे चूंचे एक दम सख्त हो कर आसमान की

तरफ सर उठाए खड़े थे।

चूत की फांकों में घुसा कर

मैने देखा कि जल्द ही उसने मेरी टांगो को खोलने में कामयाबी पा ली थी और इसलिए

अब उसके हाथ मेरे चूंचे पर जम गये। क्ठोर चूंचो को दबाते हुए उसने अपनी जीभ चूत

की फांकों में घुसा कर उपर नीचे करने लगा। जितना चूंचे वो दबाता, उतनी ही चूत से

रस निकल रहा था और जितना चूत में जीभ फिराता उतना ही चूंचे सख्त होते जा रहे थे।

वाह्ह क्या बात थी और इसलिए दोनों को ही मजा मजा था। बहुत जल्द उसने मेरे चूत

केउपरी हिस्से की मसाज अपने जीभ से कर दी थी। जीभ बलबला कर के गरम हो

चुकी थी और चूंचे मल मल के बदहाल। फिर भी कोई अपने रोल से हटने वाला न था।

अगले भाग में पढिए मेरे पति की चूंचे से चूत तक की असली यात्रा।

होठो को निगल चुके

पर सच तो ये है कि मैं अपनी रुचि प्रदर्शित नहीं करना चाहती थी। इस वजह से मैने

उसको ऐसा किया था। धीरे धीरे उसके होठ मेरे होठो को निगल चुके थे। दोनो के होठो

के बंद होने से एक दूसरे के

सुहागरात वाले राज

तो मेरे पति ने मेरा हाथ पकड़ के अपने हाथो तले दबा दिया और अपने प्यासे होट मेरे

गालो पर फिसलाने लगा। मेरा दिमाग एक दम से खराब हो रहा था। उसकी कामुक हरकतें

मुझे सुलगा रहीं थीं और वो था कि मुझे चोदे से गुरेज कर रहा था और फालतू का फोरप्ले

करके मेरी आग भड़का रहा था। ऐसे में मैने अपनी गांड हिलानी शुरु कर दी। अब वो मेरे

उपर चढ के मुझे दबा चुका था। अब मै हिल नही सकती थी। धीरे धीरे उसने मेरे होठो पर

अपने होठ रख दिये और लगा उनको चूसने मैं बस दिखावा कर रही थी कि मुझे अच्छा

नहीं लग रहा है।

ब्लाउज के बटन खोल दिये

पर सच तो ये है कि मैं अपनी रुचि प्रदर्शित नहीं करना चाहती थी। इस वजह से

मैने उसको ऐसा किया था। धीरे धीरे उसके होठ मेरे होठो को निगल चुके थे। दोनो के

होठो के बंद होने से एक दूसरे के मुह का तरल पदार्थ एक दूसरे के अंदर जा रहा था और

हम दोनों लगभग एक होने वाले थे। मैं मदहोश होने जा रही थी पर वो पूरे होश में था कि

क्या कर रहा है और क्या करना होगा। इसलिए उसने मेरे ब्लाउज के बटन खोल दिये।

नीचे से ब्रा का फीता पकड़ के ऐसे खींचा जैसे कि टूट गया।

दूसरा चूंचा उसके सामने कर दिया

बस एक चूंचा पकड़ के बाहर निकाला और लगा चूसने बेतहाशा। मेरे दूसरे चूंचे में

आग लगी हुई थी। स्तनों को एक साथ मसलना चाहिए इस चूतिये को कौन समझाए

पर वो अलग था। उसका अंदाज ही जुदा था और इसलिए मैं उसे रोक नही सकती थी।

हाय और मैं हल्के हल्के कराहने लगी थी, मेरी सिस्कियां उसके चूसने की तेज होती

गति के साथ ही तेज होती जा रहीं थीं। मैने अपने होठो से उसके होठो को फिर से

पकड़ने की कोशिश की पर वो चूंचे से अलग होना ही नहीं चाह रहा था।

फिर मैने अपने ब्लाउज से निकाल कर खुद अपना बड़ा दूसरा चूंचा उसके सामने कर दिया।

अंदर का सारा माल

अब वह उसपर पिल पड़ा और देखते ही देखते एक दम से उसके

अंदर का सारा माल निकालने पर आमदा हो गया। ऐसी हालत में इतना

चूसए जाने के बाद मेरे बदन का तापमान एकदम हाई हो गया था।

मेरी टांगे अपने आप खुलने लगीं थीं और चूत तो गीले पन से भीग ही चुकी थी।

खैर मैं मदहोश थी और वो मेरे चूंचों को चूस चुका था। उसने हाथ लगाकर मुझे

पलट दिया। मेरा मुह बेड की तरफ हो गया और पीठा आसमान की तरफ।

अब मेरी नंगी पीठ उसके सामने थी।

 बेरहमी से मसले मेरे कठोर चूंचे।

मेरी पीठ पर अपने होठों को फिसलाते हुए उसने हल्के ह्ल्के नाखून लगाने भी जारी रखे।

नखच्छेद का यह तरीका औरतों को एक दम से पागल बना देता है। मुझे बहुत मजा आ रहा था

और ऐसा लग रहा था कि मेरे बदन में कोई घुस रहा है पीठ के माधयम से ही। पर मैने देखा,

उसने अपने नर्म गर्म होठो से मेरे बदन के हर तार को छेड़ने की कसम खा रखी थी।

दिमाग की बत्ती जल गयी

पूरी पीठ को चुसकने के बाद उस्ने मुझे फिर से सीधा लिटाया और मेरे पेट पर हल्क

हल्के हाथों से सहलाने लगा। आह्ह्ह मेरी दिमाग की बत्ती जल गयी। उसके छुअन में

जैसे जादू था। उसने मेरे पेट को छूकर के एकदम से कपकपा दिया। और फिर मेरी सेक्सी

नाभि में उंगली लगाकर गोल गोल घुमाने लगा। हाय मै तो बेकाबू होने लगी थी। मेरी

गहरी सांसों के साथ मेरे मस्त बड़े बड़े चूंचे उपर नीचे होने लगे थे।

जीभ मेरे नाभि में घुसा दी

और उसने इस बार अपनी नुकीली जीभ मेरे नाभि में घुसा दी। और गोल गोल घुमाने

लगा। मुझे सनसनी हो रही थी और बेचैनी भी। ऐसा लग रहा था कि कैसे मैं अभी इसके मुह

पर अपनी चूत के अंगारे रख कर अपनी ज्वाला शांत कर लूं पर यही बात है कि कैसे करती

जब सब कुछ आज उसके हाथ में था। मैं अपना पेट उपर नीचे करती, कपकपाती हिलती

नंगी चूंचे से कुछ कहने की कोशिश करती पर मेरा साजना तो अपनी ही धुन में था।

गांड की गोलाईयों

अब उसने मुझे फिर पलट दिया। पेटीकोट खोल कर मुझे बिन चड्ढी के कर

दिया और मेरी गांड को चूसने लगा। आह दोनों गांड की गोलाईयों को दबा कर के

उसने मेरे बदन को और भी तपा दिया। इस बार उसकी जीभ मेरे गांड में थी।

बस अंदर बाहर करने की नाकाम कोशिश्। बंद टाईट गांड में कहां कुछ हो पाता है।

मैं अपने चूंचे अपने हाथों से दबा रही थी और वो अब चुसक चुसक के मेरी गांड को चूस रहा था।

गांड हिला हिला कर

मैं निस्संदेह मस्ती में थी और मैने मारे मस्ती के गांड हिला हिला कर उसके

मुह में देने की कोशिश करनी शुरु कर दी थी। वो भी खुश था और मैं भी खुश थी तभी,

उसने मुझे पलट दिया। इस बार वो चूत चूसने के मन में था और उसने अपनी जीभ मेरे

टांगों के बीच रख दी। मैने टांगों को एक दूसरे के उपर चढा लिया। जानबूझकर और

वो भी खिलाड़ी था।

जीभ वहां से हटा कर के जांघों पर फिरानी शुरु कर दी।

उसने जीभ वहां से हटा कर के जांघों पर फिरानी शुरु कर दी। अब तो जांघें मदमस्त हो रही थीं

और खुद ब खुद धीरे धीरे ढीली होने लगीं। उसने मेरे घुटने से उपर का सारा जांघ पूरा

अच्छे से अपनी जीभ से सहलाया और फिर मेरी टांगे खुल गयीं। मेरे चूंचे एक दम

सख्त हो कर आसमान की तरफ सर उठाए खड़े थे।

कामयाबी पा ली थी

मैने देखा कि जल्द ही उसने मेरी टांगो को खोलने में कामयाबी पा ली थी और इसलिए

अब उसके हाथ मेरे चूंचे पर जम गये। क्ठोर चूंचो को दबाते हुए उसने अपनी जीभ चूत की

फांकों में घुसा कर उपर नीचे करने लगा। जितना चूंचे वो दबाता, उतनी ही चूत से रस निकल

रहा था और जितना चूत में जीभ फिराता उतना ही चूंचे सख्त होते जा रहे थे।

चूत केउपरी हिस्से की मसाज

वाह्ह क्या बात थी और इसलिए दोनों को ही मजा मजा था। बहुत जल्द उसने मेरे

चूत केउपरी हिस्से की मसाज अपने जीभ से कर दी थी। जीभ बलबला कर के गरम

हो चुकी थी और चूंचे मल मल के बदहाल। फिर भी कोई अपने रोल से हटने वाला न था।

अगले भाग में पढिए मेरे पति की चूंचे से चूत तक की असली यात्रा।

एक दूसरे के अंदर जा रहा था

एक दूसरे के अंदर जा रहा था और हम दोनों लगभग एक होने वाले थे। मैं मदहोश होने

जा रही थी पर वो पूरे होश में था कि क्या कर रहा है और क्या करना होगा। इसलिए उसने

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आग लगी हुई थी। स्तनों को एक साथ मसलना चाहिए इस चूतिये को कौन समझाए पर

वो अलग था। उसका अंदाज ही जुदा था और इसलिए मैं उसे रोक नही सकती थी।

हाय और मैं हल्के हल्के कराहने लगी थी, मेरी सिस्कियां उसके चूसने की तेज होती

गति के साथ ही तेज होती जा रहीं थीं। मैने अपने होठो से उसके होठो को फिर से पकड़ने

की कोशिश की पर वो चूंचे से अलग होना ही नहीं चाह रहा था।

मेरी टांगे अपने आप खुलने लगीं थीं

फिर मैने अपने ब्लाउज से निकाल कर खुद अपना बड़ा दूसरा चूंचा उसके सामने कर दिया।

अब वह उसपर पिल पड़ा और देखते ही देखते एक दम से उसके अंदर का सारा माल निकालने

पर आमदा हो गया। ऐसी हालत में इतना चूसए जाने के बाद मेरे बदन का तापमान एकदम

हाई हो गया था। मेरी टांगे अपने आप खुलने लगीं थीं और चूत तो गीले पन से भीग ही चुकी थी।

खैर मैं मदहोश थी और वो मेरे चूंचों को चूस चुका था। उसने हाथ लगाकर मुझे पलट दिया। मेरा

मुह बेड की तरफ हो गया और पीठा आसमान की तरफ। अब मेरी नंगी पीठ उसके सामने थी।

 बेरहमी से मसले मेरे कठोर चूंचे।

मेरी पीठ पर अपने होठों को फिसलाते हुए उसने हल्के ह्ल्के नाखून लगाने भी जारी रखे। नखच्छेद

का यह तरीका औरतों को एक दम से पागल बना देता है। मुझे बहुत मजा आ रहा था और ऐसा

लग रहा था कि मेरे बदन में कोई घुस रहा है पीठ के माधयम से ही। पर मैने देखा, उसने अपने नर्म

गर्म होठो से मेरे बदन के हर तार को छेड़ने की कसम खा रखी थी।

पेट पर हल्क हल्के हाथों से

पूरी पीठ को चुसकने के बाद उस्ने मुझे फिर से सीधा लिटाया और मेरे पेट पर हल्क हल्के हाथों

से सहलाने लगा। आह्ह्ह मेरी दिमाग की बत्ती जल गयी। उसके छुअन में जैसे जादू था।

उसने मेरे पेट को छूकर के एकदम से कपकपा दिया। और फिर मेरी सेक्सी नाभि में उंगली

लगाकर गोल गोल घुमाने लगा। हाय मै तो बेकाबू होने लगी थी। मेरी गहरी

सांसों के साथ मेरे मस्त बड़े बड़े चूंचे उपर नीचे होने लगे थे।

मेरी गांड को चूसने लगा

और उसने इस बार अपनी नुकीली जीभ मेरे नाभि में घुसा दी। और गोल गोल घुमाने लगा।

मुझे सनसनी हो रही थी और बेचैनी भी। ऐसा लग रहा था कि कैसे मैं अभी इसके मुह पर

अपनी चूत के अंगारे रख कर अपनी ज्वाला शांत कर लूं पर यही बात है कि कैसे करती जब

सब कुछ आज उसके हाथ में था। मैं अपना पेट उपर नीचे करती, कपकपाती हिलती नंगी

चूंचे से कुछ कहने की कोशिश करती पर मेरा साजना तो अपनी ही धुन में था।

पेटीकोट खोल कर मुझे बिन चड्ढी के कर दिया

अब उसने मुझे फिर पलट दिया। पेटीकोट खोल कर मुझे बिन चड्ढी के कर

दिया और मेरी गांड को चूसने लगा। आह दोनों गांड की गोलाईयों को दबा कर के

उसने मेरे बदन को और भी तपा दिया। इस बार उसकी जीभ मेरे गांड में थी।

बस अंदर बाहर करने की नाकाम कोशिश्। बंद टाईट गांड में कहां कुछ हो पाता है।

मैं अपने चूंचे अपने हाथों से दबा रही थी और वो अब चुसक चुसक

के मेरी गांड को चूस रहा था।

टांगों के बीच रख दी

मैं निस्संदेह मस्ती में थी और मैने मारे मस्ती के गांड हिला हिला कर उसके

मुह में देने की कोशिश करनी शुरु कर दी थी। वो भी खुश था और मैं भी खुश थी तभी,

उसने मुझे पलट दिया। इस बार वो चूत चूसने के मन में था और उसने

अपनी जीभ मेरे टांगों के बीच रख दी। मैने टांगों को एक दूसरे के उपर चढा लिया।

जानबूझकर और वो भी खिलाड़ी था।

चूंचे एक दम सख्त

उसने जीभ वहां से हटा कर के जांघों पर फिरानी शुरु कर दी। अब तो जांघें

मदमस्त हो रही थीं और खुद ब खुद धीरे धीरे ढीली होने लगीं। उसने मेरे घुटने से

उपर का सारा जांघ पूरा अच्छे से अपनी जीभ से सहलाया और फिर मेरी टांगे खुल गयीं।

मेरे चूंचे एक दम सख्त हो कर आसमान की तरफ सर उठाए खड़े थे।

चूंचो को दबाते हुए

मैने देखा कि जल्द ही उसने मेरी टांगो को खोलने में कामयाबी पा ली थी और

इसलिए अब उसके हाथ मेरे चूंचे पर जम गये। क्ठोर चूंचो को दबाते हुए उसने

पनी जीभ चूत की फांकों में घुसा कर उपर नीचे करने लगा। जितना चूंचे वो दबाता,

उतनी ही चूत से रस निकल रहा था और जितना चूत में जीभ फिराता उतना

ही चूंचे सख्त होते जा रहे थे।

जीभ बलबला कर के गरम हो चुकी

वाह्ह क्या बात थी और इसलिए दोनों को ही मजा मजा था। बहुत जल्द उसने

मेरे चूत केउपरी हिस्से की मसाज अपने जीभ से कर दी थी। जीभ बलबला कर के

गरम हो चुकी थी और चूंचे मल मल के बदहाल। फिर भी कोई अपने रोल से हटने

वाला न था। अगले भाग में पढिए मेरे पति की चूंचे से चूत तक की असली यात्रा।

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