बस में शुरू हुई सुख की सफारी

बस में शुरू हुई सुख की सफारी
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लक्सरी बस में सिट बुक करवा दी

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मेरा नाम रवी हे और मैं दिल्ली में काम करता हू | एक दिन मुझे कंपनी वालो ने

मुझे ऑफिस के काम से बहार जाने को कहा, मेरे साथ उन्होंने अपनी एक सेक्रेट्री को

भी भेज दिया ताकि मुझे वह पे काम में कोई तकलीफ न हो | हम दोनों के लिए पहले

से एक लक्सरी बस में सिट बुक करवा दी थी | हम दोनों समय पे बस के लिए पहुच

ए और फिर कुछ आधे घंटे में बस चालू हो गयी | हम दोनों काम की बात करते करते

निजी बातों पे भी पहुच गए और बहुत जल्दी हम बहुत खुल चुके थे | मैं उससे बिच बिच

में छू भी देता पर वो कुछ न बोलती |

उसके सर पे हाथ

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धीरे धीरे उसे नींद आने लगी तो वो सो गयी और उसने सर मेरे कंधे पे रख दिया |

बस के हिलने के कारण उसका सर कंधे से खिसक के मेरी छाती पे आ गया | मैं उसके

सर पे हाथ फेरने लगा पर मेरी नजर बार बार उसके चुच्चो पे जा रही थी तो मैं धीरे धीरे

उसके हाथ से होते हुए उसके चुच्चो पे आ गया और उसके मम्मे पे हाथ फेरने लग गया |

 मम्मे दबाने लग गया
मम्मे दबाने लग गया

उसकी साँसे तेज होने लग गयी

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वो नींद में थी या फिर कैसे थी पता नही पर उसकी साँसे तेज होने लग गयी |

कुछ देर के बाद मैं रुक गया तो वो अचानक बोल उठी की करते रहो अच्चा लग रहा हे |

मैं बोला तुम सोई नही क्या ? वो बोली सोई तो थी पर तुम्हारे प्यार ने मुझे जगा दिया |

मेने फिर उसके माथे को चूमा और फिरसे उसके मम्मे पे हाथ फेरने लग गया | मेने उसे

फिरसे अपनी गोद में सुला दिया और उसकी सूट के गले वाले हिस्से से मेने हाथ डाल

दिया और उसके मम्मे दबाने लग गया |

उसका जिस्म एक दम तवे की तरह गर्म था, मैं उसके मम्मो को कस कस के दबाने लग गया तो उसने मुझे अपने जिस्म से कस के जकड लिया और अह्ह्ह ह्म्म्म कर के हल्के हल्के सिसकिय ले रही थी | मैं उसके मम्मो को मसलने के साथ साथ उसके निप्पल को भी मसलता रहता |

चुत पे हल्के हल्के पर कडक बाल

मेने कुछ देर ये सब करने के बाद कहा की और मजे करने हे ? वो बोली हाँ करना हे पूरी रात करनी हे | उस वक्त रात के दस बज रहे थे और सब बस में सो चुके थे | मेने उसे कहा की अपनी लेगिस निचे करदो फिर देखना क्या मजा देता हू, वो पहले कुछ सोची और फिर उसने लेगिस निचे कर दी | मेने उसे फिरसे अपने गोद में सोचे को कहा और फिर उसके मम्मे मसलने लग गया | दो मिनट के बाद मेने उसकी पेंटी के अंदर हाथ डाल दिया | उसकी चुत पे हल्के हल्के पर कडक बाल थे और चुत गीली भी थी | मैं उसकी चुत पे ऊँगली रगड़ने लग गया और वो मुझे कसने लग गयी |

मैं कुछ देर करते करते उसके छेद की तरफ बड़ा और फिर उसके होठो पे अपने होठ रख दिए | मैं उसके होतो को चूसने लगा और चुत के छेद के पास ऊँगली रगड रहा था |

मस्ती में हल्की हल्की सिसकिय

वो एक दम जोश में आ चुकी थी और मेरे होठो को काट रही थी | मेने उसके होठो को अपने होठो से दबा लिया और उसके चुत के छेद में ऊँगली डाल दी, ऊँगली घुसते ही उसने मेरे होठो को कस के काट लिया और अपने दातो के बिच मेरे होठ को पकड़ लिया | उस समय तो मेरी गांड फट गयी थी, की होठो को ये काट देगी | मेने अपनी ऊँगली कुछ देर उसकी चुत में रहने दिया और फिर धीरे से बहार निकला और फिरसे अंदर डाल दिया |

पाँच छे बार करने के बाद उसका दर्द कम हुआ और फिर में कस कस के ऊँगली अंदर बहार करने लग गया और वो पुरे मस्ती में हल्की हल्की सिसकिय भर रही थी | मेने अपनी पनेट की जीप खोल दी तो उसके मुह के सामने मेरा लंड आ गया |

होटल में क्या किया

मेरे लंड को देखते ही वो उसके पकड़ के चूमने लगी और फिर खुद ही मुह में भर ली और चूसने लगी | करीब दस मिनट तक में उसकी चुत में उंगलिय और वो झड गयी और मैं भी उसी वक्त उसके मुह में झड गया | हम फिर दस मिनट रुके और फिरसे एक और बार करने लग गए | रात भर हमने यही किया रुक रुक के और दूसरे दिन दोपहर को वह पहुच के होटल में क्या किया वो अगले कहानी में बताऊंगा |

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