माँ बहार, पड़ोस की लड़की अंदर

माँ बहार, पड़ोस की लड़की अंदर
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सील तोड़ने में किसको मज़ा नहीं आता

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हाई दोस्तों, मेरा नाम समीर हैं, और दोस्तों में उन लोगो की तरह नहीं हू

जिनका लंड २” का हो और सबको बताये ९” का |

मेरा लंड कितना बड़ा है मुझे नहीं पता मगर इतना बड़ा भी नहीं हे की

कोई देख के डर जाये, जेसे की कई लोग कहते हे की वो मेरा लंड देख के डर गयी |

और लंड कितना मोटा हो या कितना छोटा सील जब टूटता हे दो दर्द बहुत होता हैं |

मगर ये बात हे की कोई भी दर्द नहीं लेना चाह्येगी भले उसके बाद मज़ा कितना भी आये |

साडी लकडिया यही चाहती हे की दर्द कम हो और मज़ा आये | इसीलिए बहुत

सी लड़किया मेरे जेसे छोटे लंड पसंद करती हैं ताकि दर्द कम हो बाद में किसी का भी लंड

आये, परवा नहीं |और वेसे भी सील तोड़ने में किसको मज़ा नहीं आता, भाई मुझे तो

बहुत आता हैं |

उसका शारीर कुछ ऐसा

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जेसा की मेने आपको बताया की मेने काफी लकडियो का सील तोड़

चूका हुआ, इसी लिए मुझे नई लडकियो की आदत लगी हे, की बस छोडना हे तो

नई चुत वरना नहीं | वेसे में पुरानी चुत भी मरता हू मगर तब ही जब मुझे नई नहीं मिलती |

इसी तरह मेने अब तक १९ सिले तोड़ चुकी हैं | बिस्वा निचे आ रहा हैं |यह बात तब की है

जब मैं और मेरे घर वाले सब दिल्ली गए हुए थे, नया घर खरीदने | तो जहा हमने घर लिया

था उसके सामने एक और घर था उसमे एक परिवार रहता था | उसमे एक लड़की थी जिसे

मेने अपने घर के आस पास सबसे पहले देखा, वी दिखने में मस्त थी और उसकी उम्र भी

कुछ १८ – १९ होगा |

उसका शारीर कुछ ऐसा था, चुचे उसके छोटे थे, जिसपे मुझे बहुत दुःख हुआ, होठो

उसके एक दम गुलाब की तरह, कमर तो बस पूछो मत एक दम पतली मस्त, और

गांड तो गजब की थी उसकी |

लंड भूक से तड़प उठता

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हमे अपने नाये घर में ए ५ दिन भी नहीं हुए मेने उसके गोर

किया तो देखा की वो मुझे बार बार देखती रहती हैं |

जब भी वो देखती मेरा मन करता की उसको यही पटक के रस्ते पे पेल दू |

और यही सोच के मेरा लंड भूक से तड़प उठता |मेने कई बार सोचा की पटा लेता  हू,

मगर बढ़ में यह सोच के रुक जाता की अगर वो शुरू करे तो और भी अच्छा होगा |

एक दिन की बात हे मैं किसी काम से बहार गया हुआ था और मेरे घर वाले घर पे ही थे |

उसने मोका देखा

उसने मोका देखा और मेरे घर चली गयी और मेरे मोम से यहाँ वहा के

सवाल कर कर के काफी जानकारी लेके निकल गयी जेसे, की कहा से आये हैं, घर

पे कोन कोन क्या क्या करता हैं, और मेरे बारे में भी पुच के निकल गयी | और वेसे

भी में जहा गया था वही पे काम भी करता था, सुबह १० से रात के ८ बजे तक |

 उसकी साँसे भी तेज
उसकी साँसे भी तेज

शनिवार और रविवार को ही छुट्टी रहती हैं

मेरी सिर्फ शनिवार और रविवार को ही छुट्टी रहती हैं |

उसके अगले दिन क्या हुआ की शनिवार था और वो

कॉलेज नहीं गयी और मेरी भी छुट्टी थी उस दिन,

अब वो क्यों नहीं गयी मुझे तो पता नहीं मुझे शायद यही लग रहा था

की मोम ने बता दिया होगा की मेरी छुट्टी रहती हैं शायद इसी लिए नहीं गयी होगी |

उसदिन सुबह सुबह मोम बहार पापा के साथ बाजार गयी थी और में सुबह ७ बजे के

करीब उठा, और बालकोनी गया तो देखा की वो सामने खड़ी थी, उसे देखते ही मेरी बची

कुची नींद आँखों से चली गयी |

वो भी मुझे वही से देखने लगी, में उसको कुछ पाल के लिए घूर तो

उसने मुझे वही से नमस्ते कहा और मुझे एक मिनट में

यहाँ मेरे पास आने का इशारा किया |

तुम्हे शादी करने का मन नहीं करता क्या ?

पहले तो मुझे समज नहीं आया की क्या बोली मगर कुछ

देर के बाड जब मेने उसे अपने पीछे खड़े पाया तो में समज गया की उसने

वहा से क्या इशारा किया था |मैं – क्या हुआ जी ?वो – आप मुझे इस तरह क्यों घूर रहे थे ?

इसीलिए मैं यही पे आ गयी आपसे मिलने |मैं – देखो, यह कोई मिलने का वक्त नहीं

हे सो आप कृपा करके यहाँ से चले जाये |वो – ठीक हे बाबा रोते क्यूँ हो ? चली जाउंगी,

वेसे आपको इतना डर क्यों लग रहा हैं ? वेसे तुम्हारा नाम समीर हैं ना, और तुम कही पे

काम भी करते हो ? और और और तुम्हारी अभी तक शादी भी नहीं हुई | वेसे तुम्हे शादी

करने का मन नहीं करता क्या ?

चली जाउंगी, वेसे आपको इतना डर क्यों लग रहा हैं ? वेसे तुम्हारा नाम समीर हैं

ना, और तुम कही पे काम भी करते हो ? और और और तुम्हारी अभी तक

शादी भी नहीं हुई | वेसे तुम्हे शादी करने का मन नहीं करता क्या ?

मासूम चेहरा

मैं – तुम्हे उससे क्या, मुझे क्या मन करता हैं उर क्या नहीं तुम्हे उसे

क्या लेना देना ?वो क्या था की अभी हमे यहाँ पे आये ५ दिन भी ठीक से नहीं

हुआ और कोई देख लेटा हम दोनों को तो सब क्या बोलते की केसे केसे लोग

कहा कहा आ जाते हैंवो – वो क्या हे ना की में बहुत परेशां हू आज कल, और

मेरी कोई मदद भी नहीं करता |और फिर उसका मासूम चेहरा देख के मेरा

दिल पिघल गया | मेने उससे पूछा की क्या हुआ बताओ, में तुम्हारी मदद करूँगा |

वो – आपकी मोम बता रही थी की आप अंग्रेजी में काफी अच्छे हो और वो क्या है

ना की मेरी अंगेरजी

काफी कमजोर हैं, तो में सोच रही थी की अगर आप मुझे पढा देते तो

अच्छा होता, क्युकी यहाँ पे कोई अंग्रेजी नहीं पता |–

ठीक है पढ़ा तो दूँगा, मगर मैं रात के ८ बजे के बाड ही

आता हू सो तुम्हे उसी समाये ही पढ़ा पाउँगा |वो – ठीक हैं, मैं ८ बजे आ जाया करुँगी |

खुशी के मारे घर जल्दी

फिर मेने उसे कहा की अब तुम जाओ, फिर जब वो जाने लगी तो तभी मोम आ गया, मोम को कुछ शक हुआ इसीलिए में बिना कुछ बोले चुप छाप अंदर चला गया और दरवाजे के पास चुपके से खड़े होके सुनने लगा | उनसे मोम को खुद ही सब कुछ बता दिया की अबसे वो ८ बजे रोज आएगी पढ़ने के लिए |उसके जाने के बाड मैं भी बहुत खुश था | काम पे गया तो वहा भी मन नहीं लग रहा था, जब तक में उसदिन घर नहीं आया तब तक मेरा कहीं भी मन नहीं लग रहा था |लगता भी केसे १८ – १९ उम्र की कच्ची कलि मिल रही हैं, किसी का केसे कही मन लगेगा | मैं

उसदिन खुशी के मारे

उसदिन खुशी के मारे घर जल्दी चला गया, करीब ७ बजे ही पहुच गया था | ८ बज गए और वो भी आ गयी | फिर मैं उसे बहार बैठ के पडने लगा, तो घर में हल्ला गुल्ला होने के कारण मेने उसे कहा की अंदर कमरे मैं चलके पड़ते हैं | वो भी फिर मेरे पीछे पीछे आ गयी | फिर हमदोनो बिस्तर पे बैठ गए और फिर किताबे खोल के पड़ने लग गयी | वो मुझे कई सवाल पूछी और उनमे से मेने सारे हल कर दिए | वो तो पूछे जा

रही थी और मेरा मन कही और ही था | मैं तो बस उसे ही देखे जा रहा था | फिर अचानक से उनसे अपना मुह उठा लिया और मुझसेपूछी क्या देखो रहे हो तबसे ?मैंने कहा मैं तुम्हारा चेहरा पड़ने की कोशिश कर रहा हूँ, और मुझे लग रहा हैं की तुम आज कल कुछ परेशां रहती हो |वो बोली आपने एक दम

सही कहा, और क्या क्या लिखा हैं बताओमैंने कहा और तुम्हे एक दोस्त की तलाश हैं जो तुम्हारी मदद करे  |वो बोली हा ये भी हैं | और क्या क्या लिखी हैं बताओ ?मेने कहा और यह लिखा हैं की तुम जिसको पसंद करती हो उसको जल्दी से बतादेना वरना ऐसे ही परेशां रहोगी |

सारी रात में उसके लिए तडपता

वो – अगर उसने मन कर दिया तो ?मैं – तुम्हारे जिंदिगी में उसी का प्यार लिखा हैं तो वो केसे मन करेगाफिर वो झट से मुझसे लिपट गयी और बोली समीर आई लव यु | मेने भी उसे कह दिया मी ठू |फिर हम दोनों एक दूसरे के होठो को चूमने लगे और कुछ देर तक चुमते ही रहे | फिर अचानक उसकी बाप ने बहार से आवाज़ लगे की बेटी पढाई खतम हो गयी हो तो आ जाओ, वरना बाकि कल पड़ लेना |

साडी रात कट गयी

इतना सुनते ही वो उठ के चली गयी, जब वो जा रही थी तब मेने उसे कहा की कल शमा को में बहार जा रहा हू सो तुम कल सुबह ८ आब्जे आ जाना | वो तो चली गयी और मेरी प्यास को जिंदा क्र दी, और सारी रात में उसके लिए तडपता रह गया | केसे केसे क्र के साडी रात कट गयी और फिर सुबह वो समाये पे आ गयी |

टॉप उतर दिया

जब तक वो आई थी मेरी मोम और उसकी मोम पहले से ही बहार जा चुके थे एक साथ | वो फिर सीधे मेरे कमरे मैं आ गयी, अंदर आते ही मेने अपने प्यासे होठो को उसके प्यासे होठो पे रख दिया और फिर हम एक दूसरे को चूमने और एक दूसरे के होठो को चूसने लगे | इसी चुम्मा छाती में कब मेरे हाथ उसके चुचो पे आ गए और कब मेने उसका टॉप उतर दिया कुछ पता ही नहीं चला | फिर मेने उसके चुचो को मसलना शुरू कर दिया, पहले तो मेरे हाथो को रोक रही थी ताकि में उसकी चुचियो को ना छु, मगर धीरे धीरे वो गरम होने लगी तो फिर बादमे उसने इसका कोई विरोध नहीं किया और मुझे करने दी |

लंड काफी फुल चूका

में उसकी चुचियो को मसलता रहा और धीरे धीरे उसकी साँसे भी तेज होने लगी | फिर कुछ देर के बाद वो घुटनों के बल बैठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथ में ले लिया, और उसे सहलाने लगी | उसके इस सहलाने के कारण मेरे लंड काफी फुल चूका था |फिर मेने उसे कहा की इसे किस करो तो वो कुछ सोची और फिर उसने मेरे लंड पे किस किया, मेने उसे फिर कहा की एक और बार करो तो उसने फिरसे किया और मेरे लंड पे कटा भी | फिर उसने एक और बार मेरे लंड को कटा मगर इस बार अपने दातों से मेरे लंड को पकड़ रखा |फिर मेने उसे कहा की इसे एक बार चूसो, तो वो फिर मेरे लंड को मुह में लेके चूसने लगी |

ब्रा नहीं पहनी थी

फिर काफी देर लंड चूसने के बाड मुझसे और रहा नहीं जा रहा था सो मेने उसे उठाया और उसके सारे कपडे उतर दिया, उसने सिर्फ पेंटी पहनी हुई थी और ब्रा नहीं पहनी थी | मेने फिर उसकी पेंटी भी उतर दी और में खुद भी पूरा नंगा हो गया |

जीभ से पेलने लगा चुत को

उसके बाद मेने उसे बिस्तर पे लेटा दिया, और उसकी टांगो को खोल दिया और उसकी चुत पे अपना मुह रख दिया | उसके बाड में उसकी चुत को अपनी जीभ से पेलने लगा और उसके चुत के पंखडियो को अपनी दातों से काटने लगा, धीरे धीर एउसके मुह से सिसकियो की आवाजे आने लगी और वो ह्म्म्म्म्म्म उफ़ अह्ह्ह्ह्ह्ह आऐईईइ करने लगी |उसके बाद में खड़ा

उसके मुह पे

हुआ और उसकी चुत पे अपना लंड टिका दिया और हल्का सा धक्का दिया और मेरा लंड अंदर नहीं गया | फिर मेने और थोडा जोर दिया और उसके मुह से चीख निकल पड़ी | मेने फिर उसके मुह पे अपने होठ रख दिया ताकी उसकी आवाज़ बहार तक ना जा पाए |

उसके दर्द कम होने का इंतज़ार

फिर मेने निचे और जोर दिया और मेरा लंड थोडा सा अंदर गया, मेने फिर लंड को हल्का बहार निकल के एक और बार कास के धक्का दिया और मेरा लंड उसकी चुत की दीवारों को फाड़ते हुए पूरी चुत के अंदर घुस गया | लंड अंदर क्या घुसा उसकी आँखों से आंसू निकल आये | फिर मेने उसे धयन से देखा तो वो बेहोश जेसी लग रही थी दरद के मारे | मेने फिर कुछ देर अपने लंड को अंदर ही रखा और उसके दर्द कम होने का इंतज़ार किया | कुछ देर के बाड जब उसका दर्द कम हुआ तो मेने फिर लंड को धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा | अब उसका दर्द काफी कम हो चूका था और वो भी अब मेरा साथ देने लग गयी थी |

लंड उसकी चुत के गहराई तक

अब हर धक्के पे वो अह्हह्ह और और हम्म्म्म यह्ह्ह्ह्ह ईईई एस्स्स्स्स्स करने लगी थी | फिर उसने अपनी टांगो को केरे टांगो के पीछे बांध लिया और मुझे अपनी टांगो से अपनी तरफ खिचने लगी, और उसने फिर अपने हाथो को मेरे पीठ पे रख दिया और अपने नाखूनों को गाड दी | मुझे उसके इन हरकतों से काफी मज़ा आ रहा था |

ऊऊऊओ अह्ह्ह्ह्ह फक में हर्ड अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह

मेरा लंड उसकी चुत के गहराई तक अंदर जा रहा था | मेने फिर अपने गति तेज कर दी और वो मेरे हर ढके का पूरा मज़ा उठा रही थी और मेरा साथ भी दे रही थी | वो फिर कहने लगी समीर ऊऊऊओ अह्ह्ह्ह्ह फक में हर्ड अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यीईईए ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह यस यस यस यस अम्म्म्म्म्म बहुत मज़ा आ रहा हैं समीर और और और करो और जोरसे करो ह्म्म्म्म्म्म |मुझे उसे पेलने में काफी मज़ा आ रहा था |

१५ मिनट चूड़ी

धीरे धीरे उसकी साँसे तेज होने लग गयी और उसकी आवाज़ पुरे कमरे में गूंजने लगी आआई ऊऊऊऊऊ ह्म्म्म्म्म्म्म्म्म्म अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह | इसी आवाज़ के साथ वो १५ मिनट चूड़ी और फिर झड गयी और मेरा अब तक ओउरी तरह से टन था |मैंने उसके झड़ने के बाद भी उसकी चुदाई जरी राखी और उसके झड़ने के कुछ १० मिनट बाड मैं भी उसी के चुत में झड गया | झड जाने के बाड में उसी के उपर लेटा रहा और फिर उठा और उसे चूमने लगा | उसने भी मुझे पुरे शारीर में चूमा और फिर मेरे लंड को अपने मुह में लेने लगी |

हर रविवार को हमारी चुदाई पक्की रहती थी

उसने लंड को चूस चूस के फिर से कद कर दिया और फिर से बिस्तर पे पैर फाड़ के लेट गयी और मुझे फिरसे पेलने का सहारा किया | में फिरसे उसके उपर चाड गया और उसकी जम के चुदाई की | करीब आधे घंटे के बाद हम दोनों फिरसे झड गए | वो इस बार काफी थक चुकी थी | इतना थक चुकी थी की मुझे उसे कपडे पहनाने पड़े | उसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे को उपर उपर से प्यार किया और फिर वो अपने घर चली गयी |

इसके बाड हर रविवार को हमारी चुदाई पक्की रहती थी और इसी तरह उसने मुझे अपने दो दोस्तों से भी मिलवाया | उनके साथ क्या हुआ वो फिर कभी |

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