Ek Doctor Ya Kamuk Gudiya

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दोस्तों, काफी पुरानी कहावत है, कि जहाँ आपका दिल लगता है, वही से आप को पूरा शारीरिक सुख मिल सकता है | बहुत से ऐसे शादीशुदा लोग है, जिनकी शादी या तो इस अधूरे शारीरिक सुख के कारण टूट चुकी है या टूटने की कगार पर है | मै पेशे से एक मनोवैज्ञानिक डॉक्टर हु और केवल तलाक के जाने वाले शादीशुदा जोड़ो का ही इलाज करती हु | जब भी मै कोई केस अपने हाथ मे लेती हु, तो मै दोनों पक्षों से एकसाथ और अलग-अलग मिलना पसंद करती हु | एक बार एक ऐसा केस आया, जिसमे मुझे खुद प्यार हो गया और जब उसने मुझे मेरी शारीरक भूख का एहसास करवाया; तो, मैने अपने आप को पूरी तरह से उसको समर्पित कर दिया और जो मुझे कभी मुझे अपने पति से या अपने प्रेमी से नहीं मिला, वो कमी उसने पूरी कर दी |मेरा नाम सविता है और मेरी उम्र ४० बसंत पार कर चुकी है, लेकिन मेरे अन्दर के बदन की प्यास और भूख अभी बाकी थी | कुछ पेशे की वजह से और कुछ मेरी गन्दी हरकतों की वजह से | मुझे ब्लूफिल्म देखने का शौक था और रात को मुझे ब्लूफिल्म देखकर अपनी चूत का भोसड़ा बनाये बिना नीद नहीं आती थी | मेरे पति काफी सालो पहले ही मर चुके थे और मेरे दोनों बच्चे बाहर हॉस्टल मे रहकर पढ़ते थे | एक बार मेरे पास एक बड़ा अजीब केस आया | बड़ा ही प्यारा जोड़ा था वो; शादी हुए भी कुछ ही साल हुए थी; बच्चा एक भी नहीं था | पति की सेक्स की भूख बहुत ज्यादा थी और पति को बच्चा ना होने की वजह से सेक्स और सम्भोग से नफरत हो चुकी थी | लेकिन, उसने अपने पति को पूरी आजादी दे रखी थी, ताकि वो अपनी भूख को मिटा सके | लेकिन, पति अपनी पत्नी से बेइंतह प्यार करता था, और कहीं बाहर मुह मारने को राजी नहीं था | इसलिए, दोनों लड़कर अलग-अलग रहना चाहते थे | लड़का बहुत ही गठीले बदन का मालिक था और सुंदर भी बहुत था | लड़की भी बहुत सुंदर और मस्त बदन वाली मल्लिका थी | उस लड़की का नाम और मेरा नाम एक ही था, इसलिए मुझे इससे कुछ ज्यादा लगाव हो गया था | लड़की काम भी सविता था और उसके पति का नाम राहुल | लगता था, कि भगवान् ने बहुत ही सोचसमझ कर उनकी जोड़ी बनाई थी |जब मैने उनकी कहानी सुनी, तो एक बार मेरे भी मन मे आया; कि काश ये मुझे भी एक चोद ले और मेरी तमन्ना पूरी कर दे | जब मै ये सोच रही थी, तब मुझे नहीं मालूम था; कि मेरी ये तमन्ना इतनी जल्दी पूरी हो जाएगी | मैने सविता को सब समझाया, लेकिन वो समझने को तैयार ही नहीं थी और ना ही उसका पति | फिर, मैने एक-एक दिन करके दोनों को अपने घर पर बुलाया | सविता के मन मे तो सेक्स के लिए दुबारा से तमन्ना जगानी थी और वो थोडा सा मुश्किल काम था; तो मैने पहले राहुल से मिलने का फैसला किया | उसको मैने अपने घर पर बुलाया | जब राहुल मेरे घर पर आया, तो मैने जानबूझकर बहुत सेक्सी ड्रेस पहनी थी | मेरे शरीर का एक-एक अंग तेज रोशनी मे दिख रहा था और अभी भी, मै किसी भी मर्द के लंड को खड़ा करके उसका पानी निकाल सकती थी | अपने घर पर, मै अकेले ही होती थी तो मुझे किसी का डर नहीं था | जब राहुल आया, तो मैने ही उसके लिए दरवाजा खोला और वो बस मुझे देखता रह गया | कुछ मिनटों बाद जब उसे होश आया, तो वो बोला, कि शायद मै गलत वक़्त पर आ गया हु | मैने उसको बोला, नहीं तुम एकदम सही वक़्त पर आये हो, और ये सब मेहनत मैने तुम्हरे लिए ही की है |उसका मुह खुलेकाखुला रह गया; वो सोच भी नहीं सकता था; कि काले कपड़ो के पीछे इतने मस्त और कामुक बदन की औरत हो सकती है | कहते है, कि आँखों का कनेक्शन हमारे दिमाग के साथ होता है और दिमाग का शरीर के दुसरे हिस्सों के साथ | जैसे उसकी आँखों ने मेरे पुरे शरीर को ताड़ा, उसके दिमाग ने उसके लंड को उकसाना शुरू कर दिया और उसके लंड ने पेंट के अन्दर ही झटके मारने शुरू कर दिए | मैने जब ये सब देखा, तो मैने एक बड़ी और मीठी सी मुस्कान दे दी | उसका तो पता नहीं, लेकिन कोई भी मर्द उस मुस्कान से गिर सकता था | ख़ैर, फिर मैने उसका हाथ पकड़ा और उसको अन्दर खीचकर ले गयी | वो भी बिना कुछ बोले, मेरे साथ अन्दर चला गया | मेरा घर बहुत ही तेज रोशनी मे नहाया हुआ था | और मेरी नेट वाली ड्रेस मे से मेरा गोरा बदन उसकी प्यास को जगा रहा था |मैने धीमा सा म्यूजिक चालू कर दिया और उसको सोफे पर बिठा दिया | और उसके लिए काफ्फी बनाने चली गयी | मै उसके साथ काफ्फी पीने बैठ गयी और उसकी जिन्दगी के बारे मे बातें करने लगी | शुरुवात मे, तो वो झिझक रहा था, पर जब मैने उसके हाथो को अपने हाथो मे लिया और उसके बालो मे अपना हाथ फेरा, तो वो पिघल गया और उसने अपनी सारी तकलीफ मेरे सामने रख दी | मुझे नहीं मालूम था; कि कोई अपनी बीवी के लिए इतना कुछ कर सकता है | मेरे दिल अब शरारत से भरने लगी थी और मेरी आँखे उसके लंड को देखने के लिए बेताब थी |  हम दोनों ने काफ्फी खत्म ही और अब तक हम दोनों काफी करीब आ चुके थे और उसका सर मेरी गोदी मे था | मेरे उसके बालो मे हाथ फेरते-फेरते उसके मुह पर अपना मुह कर लिया और उसके होठो पर अपने होठ रखकर चूसने लगी |मुझे इतना तो मालूम था, कि आज सब कुछ मुझे ही करना था | हम दोनों के साँसे गरम होने लगी थी और उसका लंड और तेजी के साथ झटके मार रहा था | मेरे काम बस हो ही गया था | मेरी चूत ने भी अपना पानी छोड़ना शुरू कर दिया था और रिसाव के कारण मेरी पेंटी गीली होने लगी थी | अब मुझ से ज्यादा नहीं रुका जा रहा था और मैने अपना हाथ उसके शरीर पर फेरना शुरू कर दिया और उसकी जिप और बटन खोल कर अपना हाथ अन्दर घुसा दिया और और उसके लंड को पकड़ लिया और उसका मुठ मरना शुरू कर दिया | उसके शरीर अब मज़े मे हिलने लगा था और कुछ ही मिनटों मे उसने अपना पानी छोड़ दिया | उसका शरीर शिथिल हो गया था और मै तो उसका मुठ मारते-मारते ही झड चुकी थी, लेकिन अब मेरी इच्छा उसका लंड अपने अन्दर लेने की थी |लेकिन, मैने अपने आप को संभाला और उसको वही सोने दिया और अपने कमरे मे सोने चली गयी | जब सुबह वो जागा, तो उसने मुझे से अपनी हरकत के लिए माफ़ी मांगी | लेकिन, मै खुश थी और मैने उसे उस रात फिर आने के लिए बोला | वो तो तलाक ना लेने के तैयार हो गया; बस अब उसकी बीवी को समझाना बाकी था |

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